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zindagi ki 2 line shayari


zindagi ki 2 line shayari



कभी पूछो तो तुम्हें बताये,
कभी करीब से जानो तो दिल का हाल सुनाए।
वेसे तो हम झूठी हसी लिए, चहरे से मुस्कुराए।

कभी देखो हमारे चहरे के पीछे,
कितने है हम दर्द छिपाये।
कहते हैं लोग बड़े खुश दिख रहे हैं, ये अपने तजुर्बे से बताये।
कोन जानना चाहता है, कि बेठे है हम ग़मों की दौलत छिपाए।

गिर जाते हैं हम तो सम्भाल भी लेते हैं अपने आप को,
Has देते हैं हम अपने आप पर, फिर खुदको ही सहारा बनाए।

करले सितम ye जिंदगी हम पर, हम ये हस्सी नहीं छोड़ेंगे।
झूठी होगी ये हमारे लिए, पर गैरों को कितना सताये।

सुकून तो नहीं मिलता है हमको, किसी उदास चहरे से,
Koi क्यों दुखी हैं और की हसी से, केसे ये समझाये।

ये हाल पूछने आए हैं या आये हैं मेरी खुशी का राज जानने,
हमें तो आदत है हंसने की, फिर इनकी नजरे क्यों ज़ुक जाए।

हमारी शिकायत करते हो ज़माने से  आप,
कभी हमसे ही पूछ लेते, तो शायद ये शिकायत ही ना रह जाय।

जो नजरे खुद से नहीं मिला पाते, वो इल्ज़ाम हम पर लगाए,
वो क्या समझेंगे दर्द मेरे जिन्हें दर्द नहीं, खुशी मार जाए


हमारे ग़म का कोई हिस्सेदार नहीं,
जाते नहीं वहां जहा अपना कोई काम नहीं।
फिर क्यों कोशिश करते हैं हमे ढूँढने की,
जब उनका चेहरा हमसे मुरझाए।


कोन जाने किसके दिल में क्या है,
हमारी तकदीर ना हमसे होती है।
वहीं देखेगा जिसने दी है हाथो मे लकीरें,
तो हम किसी के आगे क्यों हाथ फैलाये।

पत्थर राह में पड़े हैं या काटे किसी ने बिछाये है
जब देखा मुड़कर हमने पीछे,
तो सब अपने ही नजर आए।

कुछ यादे मुस्कान दे जाती है ,
अपने ग़मों को खुद से ही छिपा देता हूं
कोशिश नहीं करता मे उन भूली बिसरी यादों को याद करने का,
वो कातिल मुझे ही ठहराए।

कुछ कि बाते चुभ जाती है मुझे,
धार लगाए अपनी जुबान पर।
जब उससे नहीं कटती है गर्दन हमारी,
तो हम क्यों आसु बहाए।

मद मस्त अपनी मस्ती में,
वो रहता हरदम लोगों के ज़हन में। दर्द देने वाले भी सोचे,
क्या कमी रह गई हमारे ज़ख्मों मे, वो अब भी मुस्कुराए।

पूछेगा तो यही कहूँगा खुश हू में।
जानने की कोशिश करो तो पता चलेगा,
कितने दर्द है इस सीने में हम दबाये।

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